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मदीना में करने लायक 20 बेहतरीन चीज़ें
सऊदी अरब की सैर

मदीना में करने लायक 20 बेहतरीन चीज़ें

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मदीना होटल्स द्वारा

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एक ऐसी जगह जहाँ कालातीत विरासत और आध्यात्मिक गरिमा का मिलन होता है

मदीना, इतिहास और आध्यात्मिक महत्व से भरपूर एक खूबसूरत शहर है। यहाँ पवित्र स्थल और सांस्कृतिक रत्न हैं, जो मन को मोह लेते हैं। इस जीवंत केंद्र में घूमने-फिरने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है। आत्मा को सुकून देने वाली पवित्र मस्जिदों और सदियों पुराने शांत बगीचों से लेकर चहल-पहल भरे बाज़ारों और ऐतिहासिक धरोहरों तक, यह आदरणीय शहर यात्रियों को अपनी अनूठी विरासत से रूबरू होने का न्योता देता है। चाहे आप आध्यात्मिक जुड़ाव की तलाश में आए ज़ियारती हों या समृद्ध और विविधतापूर्ण अरब संस्कृति को जानने के इच्छुक घुमक्कड़, मदीना के हर मोड़ पर यादगार पल आपका इंतज़ार करते हैं। तो आइए, मदीना की उन ज़रूर देखने लायक जगहों को जानें जहाँ अतीत और वर्तमान का खूबसूरत मेल है।

आध्यात्मिक महत्व के स्थानों की सैर

पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का निवास और आख़िरी विश्राम-स्थल होने के साथ-साथ, मदीना वह शहर भी है जहाँ से इस्लाम का दुनिया भर में प्रसार शुरू हुआ। इसी वजह से दुनिया भर के मुसलमान इस शहर का बहुत आदर करते हैं। यहाँ कई मस्जिदें और ऐतिहासिक स्थल हैं, जो ज़ियारतियों को उनके दीन के और करीब लाते हैं। मदीना में घूमने के लिए कुछ बेहतरीन जगहों की सिफ़ारिशें नीचे दी गई हैं, जो यक़ीनन दिल पर आध्यात्मिक छाप छोड़ेंगी।

  • मस्जिद-ए-नबवी
मदीना में मस्जिद-ए-नबवी
मस्जिद-ए-नबवी मदीना में है।

मस्जिद-ए-नबवी पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का आख़िरी विश्राम-स्थल है। यह मस्जिद न केवल बेहद खूबसूरत है, बल्कि इसका इस्लाम की जड़ों से जुड़ा गहरा इतिहास और महत्व भी है। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने बिना किसी बाधा के जमाअत से नमाज़ अदा करने के लिए स्वयं इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। धार्मिक महत्व के अलावा, इसकी वास्तुकला इसे दुनिया की अन्य मस्जिदों से अलग बनाती है। विशाल और भव्य हरा गुंबद, दीवारों पर बारीक नक्काशी और चमचमाते संगमरमर के फ़र्श हर आने वाले ज़ायरी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। हालाँकि, ग़ैर-मुसलमानों को प्रवेश की अनुमति नहीं है, इसलिए आगंतुकों को पहले से जानकारी ज़रूर ले लेनी चाहिए।

  • मस्जिद क़ुबा
मदीना में मस्जिद क़ुबा
मस्जिद क़ुबा मदीना में है।

इस्लामी इतिहास में मस्जिद क़ुबा का बहुत महत्व है। मक्का से मदीना हिजरत करने के बाद, पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने मुसलमानों के लिए अपनी पहली इबादतगाह के तौर पर इस मस्जिद का निर्माण करवाया। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ हर शनिवार को नमाज़ अदा करने के लिए मदीना से लगभग 3 किलोमीटर पैदल चलकर मस्जिद जाते थे। हफ़्ते में एक बार मस्जिद क़ुबा जाने की इस परंपरा को "क़ुबा की सुन्नत" कहा जाता है और इसे इबादत का एक अत्यंत मुस्तहब अमल माना जाता है।

  • उहुद पर्वत पर पैदल चढ़ाई
मदीना में उहुद पर्वत
उहुद पर्वत मदीना में है।

हर मुस्लिम बच्चा उहुद की जंग की बहादुरी भरी कहानी सुनते हुए बड़ा होता है। हैरानी की बात है कि वह जगह आज तक अच्छी तरह सुरक्षित है और हर साल लाखों ज़ायरीन उस पर्वत पर आते हैं। हालाँकि यह सिर्फ़ एक पर्वत है, लेकिन मुसलमानों के लिए इसका बहुत गहरा महत्व है। यहाँ आकर आगंतुक पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के सहाबा रहे उन शहीदों के प्रति गहरी कृतज्ञता महसूस करते हैं, जिन्होंने जंग में अपनी जान दी। उहुद पर्वत न केवल एक मुक़द्दस स्थल है, बल्कि बेहद दिलकश भी है। ग़ैर-मुसलमानों को भी इस जगह की सैर का मौका नहीं चूकना चाहिए।

  • जन्नतुल बक़ी
मदीना में जन्नतुल बक़ी
जन्नतुल बक़ी मदीना में है।

पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के परिवार के लोग, जिनमें उनकी बेटी हज़रत फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हा), उनके नवासों में से एक हज़रत हसन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनकी संतानें शामिल हैं, मदीना के सबसे पुराने क़ब्रिस्तान जन्नतुल बक़ी में दफ़्न हैं। इतिहास में इस क़ब्रिस्तान को कई बार ढहाया गया है, जिससे मुस्लिम समुदायों में नाराज़गी हुई। हालाँकि, सऊदी सरकार ने अब तक इन ढाँचों को दोबारा बनाने से इनकार किया है। इस मुक़द्दस क़ब्रिस्तान में देखने के लिए भले ही बहुत कुछ न हो, लेकिन यह लगातार याद दिलाता है कि जीवन का अंतिम उद्देश्य अपने रब, अल्लाह की ओर लौटना है।

  • हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का बाग़
मदीना में सलमान अल-फ़ारसी का बाग़
सलमान फ़ारसी का बाग़ मदीना में घूमने की जगहों में से एक है।

हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु), पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के सबसे क़रीबी सहाबा में से एक थे और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने स्वयं उन्हें ग़ुलामी से आज़ाद कराया था। उन्हें आज़ाद करने के बाद पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु) के लिए खजूर का एक बाग़ लगाया, ताकि वह उसे बेचकर अपनी रोज़ी कमा सकें। आज भी यह बाग़ मानो एक टाइम कैप्सूल की तरह मौजूद है और मदीना की बेहद शांत और खूबसूरत जगहों में से एक है। इसलिए अगर आपको प्रकृति से लगाव है, तो इस बाग़ की सैर मदीना में करने लायक बेहतरीन चीज़ों में से एक है।

  • सात मस्जिदें
मदीना की सात मस्जिदें
सात मस्जिदें मदीना में घूमने की जगहों में शामिल हैं।

अल-मदीना शहर में बिखरी हुई 7 प्राचीन मस्जिदों की सैर एक अनूठी आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाती है। ये मस्जिदें सेला पर्वत के पश्चिमी हिस्से और ख़ंदक़ के युद्धक्षेत्रों के पास स्थित हैं। हर मस्जिद का अपना अनूठा इतिहास और महत्व है, जो शहर की गहरी धार्मिक आस्था और समृद्ध इस्लामी विरासत पर रोशनी डालता है। ये मस्जिदें उन लोगों की याद दिलाती हैं जिन्होंने मदीना की रक्षा की और ज़रूरत के समय मुसलमानों को आश्रय दिया। आगंतुक यहाँ इन संघर्षों के बारे में और जानने तथा इस्लाम के लिए अपनी जान देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं।

  • बनी हराम की गुफ़ा
मदीना में बनी हराम की गुफा
बनी हराम की गुफा मदीना में घूमने की जगह है।

मदीना की एक और दिलचस्प और अहम जगह बनी हराम की गुफ़ा है, जो मस्जिद-ए-नबवी के पास स्थित है और मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्व रखती है। इस गुफ़ा का महत्व इस बात में है कि ख़ंदक़ की जंग के दौरान पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने सुरक्षा और आराम के लिए यहाँ कई रातें बिताईं। इसके अलावा, बहुत से लोगों का मानना है कि अल्लाह की ओर से वह्य प्राप्त होने के बाद पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने इसी गुफ़ा में सज्दा किया था।

  • मस्जिद क़िबलतैन
मदीना में मस्जिद अल-क़िबलतैन
मस्जिद अल-क़िबलतैन मदीना में घूमने योग्य मस्जिदों में से है।

इस्लामी वास्तुकला की अहम इमारतों के बारे में जानने के दौरान आपने शायद मदीना की क़िबलतैन मस्जिद के बारे में सुना होगा, जिसे दो क़िबलों वाली मस्जिद भी कहा जाता है। सवाद बिन ग़नम नाम के व्यक्ति ने इसका निर्माण करवाया था। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ को यरूशलम से काबा की ओर क़िबले की दिशा बदलने का हुक्म मिलने के बाद इसे यह नाम मिला। दो मेहराबों वाली यह मस्जिद इस्लामी विकास का बेहतरीन उदाहरण है और इसमें ईश्वरीय मार्गदर्शन से जुड़ी कहानियाँ समाई हुई हैं।

  • ख़ैबर का क़िला

इस्लामी इतिहास में ख़ैबर के क़िले का विशेष महत्व है और हर मुसलमान को यहाँ ज़रूर जाना चाहिए। ख़ैबर क्षेत्र में स्थित यह क़िला कभी पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के दौर में यहूदी क़बीलों का मज़बूत गढ़ था। 629 CE में ख़ैबर की जंग में मुसलमानों ने निर्णायक जीत हासिल की, जिसका बड़ा श्रेय हज़रत अली इब्न अबी तालिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) की बेमिसाल बहादुरी को जाता है। आज ख़ैबर का क़िला शुरुआती इस्लामी दौर की एक प्रभावशाली निशानी के रूप में खड़ा है। यह अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को जानने और इस्लामी इतिहास को आकार देने में इसकी भूमिका को समझने के इच्छुक पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है।

मदीना के पर्यटन आकर्षण

मदीना के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के अलावा, यहाँ आने वाले लोग हर रुचि के अनुरूप कई अन्य पर्यटक आकर्षणों का भी आनंद ले सकते हैं। हमने शहर के कुछ प्रमुख आकर्षण चुने हैं, जहाँ मनोरंजन, ज्ञान और रोमांच का भरपूर मेल है।

शहर के इतिहास, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित सबसे बड़ा संग्रहालय सुप्रसिद्ध दार अल मदीना संग्रहालय है। यह संग्रहालय मदीना के अतीत पर रोशनी डालता है और इस्लामी सभ्यता की भव्यता, विरासत और इतिहास को दर्शाता है। यहाँ आने वाले लोग मदीना से जुड़े व्यापक वैज्ञानिक ज्ञान और ऐतिहासिक शोध के बारे में जान सकते हैं। इसकी खासियत दुर्लभ तस्वीरों का बड़ा संग्रह है, जिनमें उस दौर की तस्वीरें भी हैं जब शहर एक छोटा-सा कस्बा हुआ करता था। साथ ही, यहाँ ऐसी तस्वीरें और प्रतिकृतियाँ भी हैं जो शहर की सदियों पुरानी विशेषताओं को जीवंत रूप में दिखाती हैं।

  • अल हिजाज़ रेलवे संग्रहालय जाएँ
मदीना में हिजाज़ रेलवे संग्रहालय
मदीना में हिजाज़ रेलवे संग्रहालय जाएँ।

अल हिजाज़ रेलवे संग्रहालय हिजाज़ रेलवे स्टेशन में स्थित है। इसमें 14 गलियारे हैं, जहाँ कई कलाकृतियाँ और पुरानी तस्वीरें रखी गई हैं। मदीना का यह स्टेशन उस योजना के तहत बनाया गया था जिसे उस्मानी ख़िलाफ़त की राजधानी इस्तांबुल को लेवांत से होकर जाने वाली रेल के ज़रिए मदीना से जोड़ने के लिए उस्मानी सुल्तान हज़रत अब्दुल हमीद II (रहमतुल्लाह अलैह) ने तैयार किया था। हिजाज़ रेलवे संग्रहालय में उस्मानी रेल से जुड़ी वस्तुएँ, जैसे रेलगाड़ियाँ और इंजन, प्रदर्शित हैं। जब 1326 हिजरी / 1908 ईस्वी में पहली रेलगाड़ी मदीना पहुँची, तो दोनों राष्ट्रों के बीच नए संबंध की शुरुआत के उपलक्ष्य में शानदार जश्न मनाया गया।

  • स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें

मदीना पहली बार आए हैं? सोच रहे हैं कि क्या खाएँ? यहाँ के लज़ीज़ व्यंजनों को चखना न भूलें। मदीना में करने योग्य कामों की आपकी सूची में सबसे पहले स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना होना चाहिए। पारंपरिक मदीनी चावल से लेकर दही और केसर के साथ बनी मख़तूम भिंडी तथा शोरबत हब तक, कई स्वादिष्ट पकवान आज़माएँ। अपने पाक-सफ़र को पूरा करने के लिए, स्वादिष्ट बुरैक आटे की पेस्ट्री और समबूसक बफ़ भी ज़रूर चखें। एक छोटी-सी सलाह: असली स्वाद केवल सड़क किनारे के खाद्य-विक्रेताओं के यहाँ मिलता है, इसलिए वहाँ का खाना चखना न भूलें।

  • हिप-हॉप बस से शहर घूमें

हिप-हॉप बस से शहर घूमना मज़ेदार लगता है, है न? बस आकर्षक लाल डबल-डेकर टूर बसों में से किसी एक पर सवार हो जाएँ। इन बसों की मदद से पर्यटक अतिरिक्त छुट्टी लिए बिना मदीना के सभी पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक जगहों को देख सकते हैं। क़ुबा मस्जिद, अबू बक्र रोड, अल मदीना, अल बक़ी क़ब्रिस्तान और मस्जिद-ए-नबवी जैसी जगहों को देखने के लिए ये टूर बसें शानदार हैं। अगली बार समय, पैसे और मेहनत बचानी हो, तो आपको पता है कि क्या करना है!

  •  किंग फ़हद परिसर

1984 ईस्वी में सऊदी अरब के मदीना में किंग फ़हद परिसर की इस अभिनव योजना पर काम शुरू हुआ। यहाँ पवित्र क़ुरआन को विभिन्न रिवायतों, ऑडियो संस्करणों और अनुवादों के साथ प्रकाशित किया गया। दुनिया भर के मुसलमानों को क़ुरआन की शिक्षाएँ पढ़ने और समझने में मदद देने के लिए यह परियोजना कई भाषाओं में पूरी की गई। संग्रहालय के निर्देशित दौरों में शामिल होकर आगंतुक इस पवित्र पुस्तक की छपाई और जिल्दबंदी की प्रक्रिया जान सकते हैं।

  • सऊदी खजूर चखें
मदीना में खजूर का बाज़ार
मदीना में सऊदी खजूर चखने के लिए खजूर का बाज़ार एक जगह है।

सच कहें तो सऊदी अरब का ख़याल आते ही सबसे पहले नहीं, तो सबसे पहली चीज़ों में खजूर ज़रूर याद आती है। अब मदीना शहर में इन्हें चखने का मौका है। पास के बाज़ार में जाएँ और इन लज़ीज़ खजूरों का स्वाद लें। रेगिस्तान का यह फल बेहद स्वादिष्ट, पौष्टिक और खाने में मज़ेदार है। इसका छोटा आकार इसे हर सफ़र के लिए पर्स में रखने लायक नाश्ता भी बनाता है।

  • सालेह रेगिस्तान में समय बिताएँ

सालेह रेगिस्तान मदीना शहर की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। यहाँ विशाल मक़बरों और क़ब्रिस्तानों के साथ-साथ दीवारों पर बारीक चित्रकारी और शिलालेख भी देखने को मिलते हैं। इस जगह को अनोखा बनाते हैं विलुप्त नबातियन साम्राज्य के अवशेष। इन अवशेषों को इतनी अच्छी तरह संरक्षित किया गया है कि वे आपको पलक झपकते ही अतीत में पहुँचा सकते हैं। यहाँ घूमने का भरपूर आनंद लें!!

  • नूर मॉल में खरीदारी करें
मदीना में अल नूर मॉल
मदीना में अल नूर मॉल में खरीदारी करना एक विकल्प है।

नए शहर की यात्रा पर खरीदारी करना ज़रूरी है। मदीना के अल नूर मॉल में एक शाम बिताकर देखें कि शहर के आधुनिक शॉपिंग सेंटर कैसे हैं। इस आधुनिक और विशाल मॉल में हर किसी के लिए कुछ न कुछ है—यहाँ बड़े ब्रांडों की दुकानों से लेकर स्थानीय सामान और अरमानी तथा गुच्ची जैसे प्रीमियम ब्रांड तक उपलब्ध हैं। अल नूर मॉल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारोबारों के अलावा फ़ूड कोर्ट, खेल-कूद के क्षेत्रों और बच्चों के ज़ोन के लिए भी अलग जगह है। खरीदारी का आनंद लें!

  • वादी-ए-जिन्न
मदीना के पास वादी-ए-जिन
वादी-ए-जिन मदीना के पास स्थित है।

क्या आपको भूतों की तलाश और परालौकिक चीज़ों में दिलचस्पी है? अगर हाँ, तो इस जगह को देखना न भूलें। इसे “जिन्नों की घाटी” कहा जाता है और यह सऊदी अरब के अल-नमास प्रांत में स्थित है। यह घाटी एक दिलचस्प और हैरान करने वाली घटना के लिए मशहूर है: यहाँ कारें बिना किसी बाहरी मदद के अपने-आप चढ़ाई की ओर जाती हुई दिखाई देती हैं। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, जादुई मुलाक़ातों की कहानियाँ यहीं से शुरू हुईं। इन कथाओं में कहा जाता है कि इस्लामी धर्म में अलौकिक प्राणी माने जाने वाले जिन्न घाटी में रहते हैं। फिर भी, यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। क्या आप यहाँ घूमने का साहस करेंगे?

  • अस्सलाम संग्रहालय

अस्सलाम संग्रहालय का उद्देश्य इस्लामी विरासत के सभी पहलुओं को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है। पांडुलिपियाँ, ऐतिहासिक धरोहरें और कलाकृतियाँ इस्लामी सभ्यता के समृद्ध और विविध पहलुओं को सामने लाती हैं। यह संग्रहालय आगंतुकों को इस्लाम के इतिहास और मुस्लिम बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों तथा कलाकारों के योगदान से परिचित कराता है। मल्टीमीडिया प्रदर्शनियों, संवादात्मक प्रदर्शनों और शैक्षिक संगोष्ठियों के कारण यह सीखने का अनुभव रोचक और ज्ञानवर्धक बनता है। अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी है, तो इसे देखना न भूलें।

  • क़ुबा क़िला

प्राचीन खंडहरों की कमी के बावजूद, क़ुबा क़िला मदीना का एक प्रतिष्ठित स्थल है। 1915 और 1918 के बीच फ़ख़री पाशा की सीमा पर बना यह क़िला उस व्यापार मार्ग की एक अहम कड़ी था, जो यमन और सऊदी अरब की राजधानी मक्का को जोड़ता था। यहाँ आकर आप रेगिस्तानी क़ाफ़िलों की आवाज़ों और पुराने खोजकर्ताओं तथा व्यापारियों के घोड़ों के कीचड़ भरे रास्तों पर पड़ते कदमों की कल्पना कर सकते हैं।

मस्जिद-ए-नबवी के पास होटल

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