जन्नतुल बक़ी सऊदी अरब के मदीना में स्थित एक कब्रिस्तान है, जो मस्जिद-ए-नबवी के दक्षिण-पूर्व में है। यह इस्लामी दुनिया के सबसे पुराने और सबसे पवित्र कब्रिस्तानों में से एक है। यह कब्रिस्तान लगभग 1.12 हेक्टेयर (2.8 एकड़) क्षेत्र में फैला है और यहाँ 7,000 से अधिक कब्रें हैं। इस कब्रिस्तान को बक़ी' अल-ग़रक़द के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है "काँटेदार झाड़ियों का कब्रिस्तान"। यह नाम एक हदीस की ओर संकेत करता है, जिसमें कहा गया है कि क़यामत के दिन बक़ी' अल-ग़रक़द में दफ़्न लोग जन्नत में दाख़िल होने वालों में सबसे पहले होंगे।
जन्नतुल बक़ी का निर्माण 622 ईस्वी में पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ द्वारा मदीना शहर की स्थापना के कुछ ही समय बाद हुआ था। शुरुआत में इसका इस्तेमाल पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के सहाबा और उनके परिवारों को दफ़्न करने के लिए किया जाता था। इसी कारण इसे इस्लाम के सबसे सम्मानित स्थलों में से एक माना जाता है। सदियों के दौरान कब्रिस्तान का विस्तार हुआ है, लेकिन कई मूल कब्रें अब भी यहाँ मौजूद हैं। जन्नतुल बक़ी में दफ़्न हस्तियों में पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की बेटी हज़रत फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हा); पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के नवासे हज़रत हसन इब्न अली (रज़ियल्लाहु अन्हु); तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान इब्न अफ़्फ़ान (रज़ियल्लाहु अन्हु); और पहले ख़लीफ़ा हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) शामिल हैं।
आज जन्नतुल बक़ी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक लोकप्रिय ज़ियारत स्थल है। हर साल लाखों ज़ायरीन हज या उमरा अदा करने के लिए मदीना आते हैं—और उनमें से कई जन्नतुल बक़ी की ज़ियारत भी ज़रूर करते हैं। यह कब्रिस्तान पूरे साल ज़ायरीन के लिए खुला रहता है और यहाँ प्रवेश का कोई शुल्क नहीं है।






