मस्जिद-ए-नबवी, जिसे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद भी कहा जाता है, मदीना में घूमने की सबसे अहम जगहों में से एक है और मस्जिद अल-हराम के बाद दूसरा सबसे पवित्र स्थान है। हर साल लाखों मुसलमान नमाज़ अदा करने, पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का सम्मान करने और मदीना’की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानने के लिए इस मस्जिद में आते हैं। मक्का से मदीना की ओर हिजरत करने के बाद पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने इसका निर्माण करवाया था। वर्षों के दौरान इसका कई बार विस्तार हुआ और यह दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक बन गई। मस्जिद की वास्तुकला में 27 खुलने-बंद होने वाले गुंबद, स्तंभ, मेहराब और इस्लामी शैली की बारीक सजावट शामिल हैं, जो इस्लामी कला और वास्तुकला का शानदार नमूना पेश करते हैं।
मस्जिद के भीतर कई अहम स्थान हैं, जिनका गहरा आध्यात्मिक महत्व है। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की क़ब्र, जिसे हुजरा-ए-मुक़द्दसा भी कहा जाता है, उनकी आरामगाह है और मस्जिद के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। जन्नतुल बक़ी का क़ब्रिस्तान, जहाँ पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के उन सहाबा की क़ब्रें हैं जिन्होंने इस्लाम के लिए अपनी जान दी, रियाज़ुल जन्ना जिसे जन्नत का एक हिस्सा माना जाता है, और मेहराब-ए-नबवी, जहाँ से पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ नमाज़ की इमामत किया करते थे—ये सभी मस्जिद के भीतर मौजूद हैं।
मस्जिद-ए-नबवी में आपका दिन अच्छी तरह बिताने में मदद के लिए हमने मस्जिद-ए-नबवी में करने लायक़ चीज़ों की सूची तैयार की है। इसे देखें और अपनी यात्रा को यादगार बनाएँ!
एक नज़र में
11 जगहें · स्वाइप करें
01सुबह, 7:00 बजे - फ़ज्र की नमाज़ अदा करेंअपनी सुबह की शुरुआत मस्जिद-ए-नबवी के शांत वातावरण में फ़ज्र की नमाज़ अदा करके करें। इस मस्जिद में फ़ज्र की…
02सुबह 8:00 बजे - रौज़ा-ए-रसूल की ज़ियारत करेंरौज़ा-ए-रसूल, जिसे हुजरा-ए-मुक़द्दसा भी कहा जाता है, मस्जिद-ए-नबवी का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि यहीं…
03सुबह 10:00 बजे: जन्नतुल बक़ी की ज़ियारत करेंपैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद के पूर्वी तरफ़ स्थित जन्नतुल बक़ी मदीना का प्रमुख क़ब्रिस्तान है। इस्लाम में…
04दोपहर, 12:00 बजे - ज़ुहर की नमाज़ अदा करेंपैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद में ज़ुहर की नमाज़ सुकून और आध्यात्मिक ताज़गी का समय है। मदीना के ऊपर सूरज…
05दोपहर 1:00 बजे - छतरियों के नीचे बैठेंमस्जिद के प्रांगण में लगी खुलने-बंद होने वाली छतरियाँ मस्जिद-ए-नबवी की सबसे विशिष्ट वास्तुशिल्प विशेषताओं…
06दोपहर 3:00 बजे - पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी पर बनी प्रदर्शनी देखेंमस्जिद-ए-नबवी के ठीक बगल में एक खूबसूरती से सजाई गई प्रदर्शनी है, जो ज़ायरीन को पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की…
07शाम, 5:00 से 6:00 बजे - अस्र और मग़रिब की नमाज़ अदा करेंपैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद में अस्र और मग़रिब की नमाज़ अदा करना एक शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देने…
08शाम 7:00 बजे - रौज़ा-ए-रसूल (रियाज़ुल जन्ना) की ज़ियारत करेंरौज़ा-ए-रसूल (रियाज़ुल जन्ना), जिसका अर्थ है जन्नत का बाग़, मस्जिद-ए-नबवी के भीतर एक ऐसी जगह है जिसे जन्नत…
09रात 8:00 बजे - मिम्बर और मेहराब-ए-नबवी देखेंअंसार ने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की सुविधा के लिए मिम्बर (उपदेश देने का स्थान) बनवाया था। लंबे ख़ुत्बे देते समय…
10रात 9:00 बजे – इशा की नमाज़ अदा करेंपैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद में इशा की नमाज़ अदा करना बेहद सुकूनभरा और मनमोहक अनुभव है। सूरज ढलने लगता है…
11रात 10:00 बजे, क़ुरआन की मजलिसों में शामिल होंपैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद के विशाल प्रांगण में लोगों को गोल बैठकर क़ुरआन पढ़ते और उसका अर्थ समझते देखना…

सुबह, 7:00 बजे - फ़ज्र की नमाज़ अदा करें
अपनी सुबह की शुरुआत मस्जिद-ए-नबवी के शांत वातावरण में फ़ज्र की नमाज़ अदा करके करें। इस मस्जिद में फ़ज्र की नमाज़ अदा करने पर दूसरी मस्जिदों की तुलना में ज़्यादा सवाब मिलता है। सूरज की पहली किरणें मस्जिद की मीनारों को छूती हैं और अज़ान की खूबसूरत आवाज़ गूँजती है, तो यह अल्लाह से जुड़ाव का एहसास कराती है और ज़ायरीन को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति देती है।

सुबह 8:00 बजे - रौज़ा-ए-रसूल की ज़ियारत करें
रौज़ा-ए-रसूल, जिसे हुजरा-ए-मुक़द्दसा भी कहा जाता है, मस्जिद-ए-नबवी का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि यहीं पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ दफ़्न हैं। इसी जगह पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का विसाल हुआ था। हुजरा-ए-मुक़द्दसा के प्रवेश द्वार पर लगी सुनहरी जाली से आप पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ, हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) और हज़रत उमर इब्न अल-ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अन्हु) की क़ब्रों की झलक देख सकते हैं। इसके गहरे आध्यात्मिक महत्व के कारण यहाँ अक्सर बहुत भीड़ रहती है और ज़ायरीन अपनी बारी का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह सुकून, आत्मचिंतन और दिल से इबादत करने की जगह है।

सुबह 10:00 बजे: जन्नतुल बक़ी की ज़ियारत करें
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद के पूर्वी तरफ़ स्थित जन्नतुल बक़ी मदीना का प्रमुख क़ब्रिस्तान है। इस्लाम में इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। यह पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के कई सहाबा और परिवार के सदस्यों की आख़िरी आरामगाह है। यहाँ ज़ियारत के दौरान दिवंगत लोगों का सम्मान करें और उनके लिए दुआ करें।

दोपहर, 12:00 बजे - ज़ुहर की नमाज़ अदा करें
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद में ज़ुहर की नमाज़ सुकून और आध्यात्मिक ताज़गी का समय है। मदीना के ऊपर सूरज चढ़ने के साथ मस्जिद का संगमरमर का फ़र्श गर्म होने लगता है और प्रांगण में सर्वशक्तिमान अल्लाह से मग़फ़िरत और बरकतें माँगने वाले नमाज़ियों की भीड़ बढ़ने लगती है।

दोपहर 1:00 बजे - छतरियों के नीचे बैठें
मस्जिद के प्रांगण में लगी खुलने-बंद होने वाली छतरियाँ मस्जिद-ए-नबवी की सबसे विशिष्ट वास्तुशिल्प विशेषताओं में से एक हैं। इन्हें इस तरह बनाया गया है कि ज़ायरीन को खुले में नमाज़ पढ़ने की आरामदायक जगह मिले और वे धूप की तेज़ किरणों से भी सुरक्षित रहें। ये विशाल छतरियाँ खुलकर बड़ा-सा साया बनाती हैं, जो पूरे प्रांगण को ढक लेता है और जगह को ठंडा तथा छायादार बना देता है। छतरियों को खुलते और बंद होते देखना बेहद शानदार नज़ारा है। यह आधुनिक वास्तुशिल्प को रोज़ाना हज़ारों ज़ायरीन की ज़रूरतों के अनुरूप ढालने का उपयोगी और आकर्षक उदाहरण भी है।
ﷺ की ज़िंदगी पर बनी प्रदर्शनी देखें" width="950" height="500" srcset="/ri/480/blog/posts_images/more_imgs/175219404024-24-hours-in-masjid-al-nabawi.webp 480w, /ri/780/blog/posts_images/more_imgs/175219404024-24-hours-in-masjid-al-nabawi.webp 780w, /blog/posts_images/more_imgs/175219404024-24-hours-in-masjid-al-nabawi.webp 950w" sizes="(max-width: 767px) 100vw, 768px" loading="lazy" decoding="async">दोपहर 3:00 बजे - पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी पर बनी प्रदर्शनी देखें
मस्जिद-ए-नबवी के ठीक बगल में एक खूबसूरती से सजाई गई प्रदर्शनी है, जो ज़ायरीन को पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी से परिचित कराती है। इसमें बेहतरीन ढंग से तैयार किए गए प्रदर्शन, जानकारीपूर्ण पैनल और पुरावशेष हैं, जो आपको अतीत में ले जाकर पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी, उनकी कामयाबियों और कठिनाइयों के बारे में जानने का अवसर देते हैं। संग्रहालय में इस्लाम के विविध इतिहास को और गहराई से जानने का मौका मिलता है। यहाँ अहम स्थानों और घटनाओं के नमूने भी प्रदर्शित हैं। इसके अलावा, यहाँ का शांत वातावरण ज़ायरीन को अपनी गति से सम्मानपूर्वक जानकारी हासिल करने का अवसर देता है।

शाम, 5:00 से 6:00 बजे - अस्र और मग़रिब की नमाज़ अदा करें
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद में अस्र और मग़रिब की नमाज़ अदा करना एक शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देने वाला अनुभव है। दोपहर की धूप धीरे-धीरे कम होने लगती है और मस्जिद का संगमरमर का फ़र्श सुनहरी रोशनी में नहा उठता है। यह दुनिया के सबसे खूबसूरत सूर्यास्तों में से एक का नज़ारा पेश करता है। प्रांगण में सुकूनभरी ख़ामोशी छा जाती है, जो आत्मचिंतन और एकांत की ओर प्रेरित करती है।

शाम 7:00 बजे - रौज़ा-ए-रसूल (रियाज़ुल जन्ना) की ज़ियारत करें
रौज़ा-ए-रसूल (रियाज़ुल जन्ना), जिसका अर्थ है जन्नत का बाग़, मस्जिद-ए-नबवी के भीतर एक ऐसी जगह है जिसे जन्नत का हिस्सा माना जाता है। यह पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के मिम्बर और उनकी क़ब्र के बीच स्थित है और इसकी पहचान हरे कालीनों से होती है। यहाँ ज़ियारत के दौरान इस पाक जगह में कम-से-कम 2 रकअत नमाज़ अदा करने की कोशिश करें, क्योंकि माना जाता है कि इससे आध्यात्मिक लाभ मिलता है। इस जगह पर गहरा सुकून और संतोष महसूस होता है, जो इसे मदीना के सबसे बेहतरीन पवित्र स्थानों में से एक बनाता है।

रात 8:00 बजे - मिम्बर और मेहराब-ए-नबवी देखें
अंसार ने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की सुविधा के लिए मिम्बर (उपदेश देने का स्थान) बनवाया था। लंबे ख़ुत्बे देते समय पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ थक जाते थे और पास के खजूर के पेड़ का सहारा लेकर आराम करते थे। जब अंसार ने यह देखा, तो उन्होंने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ से पूछा कि क्या वे उनके लिए एक मिम्बर बना सकते हैं। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने इसकी अनुमति दे दी और इस तरह मिम्बर बनाया गया। आज यह मस्जिद-ए-नबवी का अहम हिस्सा है और यहाँ से अब भी कई महत्वपूर्ण ख़ुत्बे दिए जाते हैं।

रात 9:00 बजे – इशा की नमाज़ अदा करें
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद में इशा की नमाज़ अदा करना बेहद सुकूनभरा और मनमोहक अनुभव है। सूरज ढलने लगता है और मस्जिद रोशनी से जगमगाने लगती है, जिससे यह नमाज़ पढ़ने और अल्लाह से बरकतें माँगने की बेहतरीन जगहों में से एक बन जाती है। नमाज़ के बाद आप यहाँ रुककर कुछ समय चिंतन और आत्ममंथन में भी बिता सकते हैं।

रात 10:00 बजे, क़ुरआन की मजलिसों में शामिल हों
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद के विशाल प्रांगण में लोगों को गोल बैठकर क़ुरआन पढ़ते और उसका अर्थ समझते देखना आम बात है। ज़ायरीन इन समूहों में शामिल हो सकते हैं, पढ़ने में हिस्सा ले सकते हैं, तिलावत सुन सकते हैं और ईश्वरीय संदेश को समझ सकते हैं। यह सबको साथ लेकर चलने वाली परंपरा पवित्र ग्रंथ को सिखाने और याद करने को आसान बनाती है। इन मजलिसों में दूसरे मुसलमानों से मेलजोल बढ़ाने और इस्लाम की विविधता को समझने का अवसर भी मिलता है।
मस्जिद-ए-नबवी की ज़ियारत पर आ रहे हैं? आराम और सहूलियत के साथ कुछ ही कदमों की दूरी पर ठहरें—हमारे चुने हुए होटलों को देखें और आज ही मदीना में अपने लिए बेहतरीन ठहरने की जगह बुक करें!







