मस्जिद-ए-नबवी, जिसे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, मदीना में ज़ियारत के लिए सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण इस्लामी जगहों में से एक है। इसका निर्माण पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने करवाया था। यहाँ कई महत्वपूर्ण स्थान हैं, जिनमें पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की क़ब्र, उनकी नमाज़ की जगह, उनके परिवार के सदस्यों के घर—जिनमें उनकी बेटी हज़रत फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) का घर भी शामिल है—और उनके सहाबा, जिनमें हज़रत अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु), हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) और अन्य शामिल हैं। इन जगहों में रौज़ा-ए-जन्ना भी है, जिसे जन्नत का एक हिस्सा माना जाता है। इस पवित्र स्थान को मस्जिद-ए-नबवी के सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। दुनिया भर से आने वाले ज़ायरीन यहाँ आकर अदब के साथ सलाम पेश करना चाहते हैं।
आपकी ज़ियारत को आसान और यादगार बनाने के लिए, इस गाइड में रौज़ा-ए-जन्ना के धार्मिक महत्व, प्रवेश के नियमों और प्रवेश परमिट लेने की विस्तृत प्रक्रिया बताई गई है। अंत तक पढ़ें और अपनी ज़ियारत को यादगार बनाएँ। आइए शुरू करें।
रौज़ा-ए-जन्ना क्या है?

रौज़ा-ए-जन्ना, जिसे रियाज़ुल जन्ना भी कहा जाता है और जिसका अर्थ है जन्नत का बाग़, मस्जिद-ए-नबवी के भीतर पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के मिंबर और क़ब्र के बीच स्थित है। इसे हरे कालीनों से चिह्नित किया गया है और यह मदीना की मशहूर जगहों में गिना जाता है। इसे जन्नत का एक हिस्सा माना जाता है। यहाँ आने वाले लोग कम-से-कम 2 रकअत नमाज़ पढ़ने की कोशिश करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे उनकी रूहानी बेहतरी होती है। रियाज़ुल जन्ना में इबादत करने वालों को अक्सर गहरे इत्मीनान और सुकून का एहसास होता है।
क्या रौज़ा-ए-रसूल में प्रवेश के लिए परमिट ज़रूरी है?

नवीनतम नियमों के अनुसार, रौज़ा-ए-जन्ना में प्रवेश के लिए अनुमति लेना ज़रूरी है। पुरुषों और महिलाओं—दोनों को बिना अनुमति निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश की इजाज़त नहीं है। इसकी वजह जानना चाहते हैं?
जवाब यह है: इस स्थान का महत्व और साल भर यहाँ आने वाले ज़ायरीनों की भारी संख्या, ख़ास तौर पर हज के दौरान। इसलिए, भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमति की शर्त लागू की गई है।

रौज़ा-ए-रसूल में प्रवेश के मौजूदा नियम:
रौज़ा-ए-रसूल में प्रवेश के मौजूदा नियम इस प्रकार हैं
- अपनी अनुमति दिखाने के लिए Nusuk ऐप का इस्तेमाल करना ज़रूरी है।
- ज़ियारत के लिए कुछ निर्धारित समय होते हैं। आपको अपने तय समय के दौरान ही वहाँ प्रवेश मिलेगा।
- पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग समय निर्धारित हैं।
- अक्सर बच्चों को प्रवेश की अनुमति नहीं होती, इसलिए बच्चों के साथ आने पर आपको प्रवेश न भी मिले। वहाँ जाने से पहले नवीनतम दिशा-निर्देश देख लेने की सलाह दी जाती है।
रौज़ा-ए-रसूल का परमिट कौन ले सकता है?

केवल 3 श्रेणियों के लोगों को रौज़ा-ए-रसूल का परमिट लेने का पात्र माना जाता है।
परमिट लेने के लिए आपका इनमें से एक होना ज़रूरी है:
- हज या उमरा के लिए वैध वीज़ा धारक।
- सक्रिय इक़ामा वाले सऊदी अरब के नागरिक।
- वैध वीज़ा के साथ Nusuk ऐप पर पंजीकृत पर्यटक।

रौज़ा-ए-जन्ना में प्रवेश के चरण: चरण 1
सबसे पहले, अपने फ़ोन पर उपलब्ध ऐप के अनुसार Apple App Store या Google Play से Nusuk ऐप इंस्टॉल करें। सऊदी हज और उमरा मंत्रालय ने ज़ायरीनों की हज या उमरा यात्रा में मदद के लिए इस ऐप को आधिकारिक मंच के रूप में चुना और जारी किया है।

चरण 2:
ऐप डाउनलोड करने के बाद अगला चरण पंजीकरण करके खाता बनाना है।
इसके लिए आपको:
- अपनी पसंद की भाषा चुननी होगी, जैसे उर्दू, अरबी, अंग्रेज़ी आदि।
- खाता बनाने के लिए अपना मोबाइल नंबर या ईमेल पता दर्ज करना होगा।
नियम और शर्तें स्वीकार करें और एक मज़बूत पासवर्ड बनाएँ

चरण 3:
खाता बन जाने के बाद, आगे बढ़ने के लिए ऐप आपसे आपकी निजी जानकारी और वीज़ा का विवरण माँगेगा। अपना पासपोर्ट नंबर, वीज़ा नंबर और राष्ट्रीयता दर्ज करें। अगर आप सऊदी नागरिक हैं, तो इक़ामा की जानकारी भी दर्ज करें। अंत में, बुकिंग से जुड़े विकल्पों को सक्रिय करने के लिए अपना हज या उमरा वीज़ा लिंक करें।

चरण 4:
यह अहम चरण है, जिसमें आपको परमिट का प्रकार और समय-सीमा चुननी होगी। इसके लिए ज़रूरी चरण नीचे दिए गए हैं:
- उद्देश्य के रूप में "रौज़ा-ए-रसूल में नमाज़" चुनें।
- इसके बाद, पुरुषों या महिलाओं के लिए रौज़ा चुनें।
- मस्जिद-ए-नबवी की सटीक जगह देखने के लिए मदीना का नक्शा इस्तेमाल करें।
- उपलब्ध समय में से अपनी पसंद की तारीख़ चुनें।
काम की सलाह: भीड़ से बचने और अपनी ज़ियारत का पूरा लाभ उठाने के लिए देर रात या सुबह-सवेरे का समय चुनें।
इसके अलावा, आपको रौज़ा-ए-रसूल में दुआएँ पढ़ने और नमाज़ अदा करने का बेहतर अवसर मिलेगा।

चरण 5:
अपनी पसंद का परमिट प्रकार, तारीख़ और समय चुनने के बाद
- "परमिट बुक करें" पर दबाएँ।
- इसके बाद, आपको प्रवेश पास के रूप में इस्तेमाल करने के लिए एक QR कोड दिया जाएगा। इसे खोने से बचाने के लिए इसे सेव कर लें या इसका स्क्रीनशॉट ले लें।
- अपना परमिट देखने के लिए ऐप में "मेरे परमिट" टैब खोजें।

चरण 6:
सुरक्षा के लिए, ज़ियारत से पहले अपने बनाए गए परमिट और ऐप की जाँच ज़रूर कर लें। तरीका यह है:
- Nusuk ऐप खोलें।
- आपका खाता पर क्लिक करें, फिर मेरे परमिट पर जाएँ।
- जाँचें कि आपके परमिट में QR कोड है और वह अभी मान्य है।

ज़ियारत के समय:
अपने आरक्षित समय से काफ़ी पहले रौज़ा-ए-रसूल पहुँचें। प्रवेश की कतार मस्जिद-ए-नबवी के सहन में लगती है और कभी-कभी वहाँ काफ़ी देर इंतज़ार करना पड़ सकता है।
रौज़ा-ए-रसूल की ओर जाने वाले मस्जिद-ए-नबवी के हिस्से में प्रवेश करने से पहले सुरक्षा कर्मचारी आपके Nusuk ऐप के परमिट की जाँच करेंगे। सुनिश्चित करें कि परमिट दिखाने के लिए आपके मोबाइल की बैटरी पर्याप्त चार्ज हो।
परमिट की जाँच के बाद भी आपको मस्जिद के बाहर या किसी दूसरे हिस्से में इंतज़ार करना पड़ सकता है। पवित्र रौज़ा-ए-रसूल में प्रवेश की अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए इस पल को खूबसूरत बनाएँ। ज़िक्र में मशगूल रहें और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ पर दरूद व सलाम भेजें।






