मदीना सऊदी अरब का कोई साधारण शहर नहीं है—यह आध्यात्मिक सुकून की जगह है, जहाँ दुनिया भर से लाखों मुसलमान इस सुकून को पाने आते हैं। मक्का के बाद यह इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में से एक है, जहाँ हर कोने और सड़क में पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के जीवन की कहानियाँ बसी हैं। यह शहर ‘रोशन शहर’ के नाम से मशहूर है और यहाँ मस्जिद-ए-नबवी, मस्जिद क़ुबा, मस्जिद क़िबलतैन, उहुद की गुफा, जबल अहद गार्डन और कई अन्य पवित्र स्थल हैं। मदीना की यात्रा उमराह या हज की तरह अनिवार्य नहीं है, लेकिन इससे बहुत बरकत मिलती है। इसलिए इस मुबारक शहर की यात्रा से पहले मदीना के इन दुर्लभ तथ्यों को जान लें, जो हर किसी को पता होने चाहिए।

मदीना की आबादी
लगभग 1.5 मिलियन की आबादी वाला मदीना, सऊदी अरब का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद, हर साल दुनिया भर से अनगिनत मुसलमान यहाँ आते हैं।

हिजरी कैलेंडर की शुरुआत हिजरत से
क्या आप जानते हैं कि इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर की शुरुआत पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के मक्का से मदीना प्रवास से होती है, जिसे हिजरत कहा जाता है? इस प्रवास ने न सिर्फ़ इस्लाम के इतिहास में एक अहम मोड़ दिया, बल्कि एक नए चंद्र वर्ष की शुरुआत भी की। इस्लामी कैलेंडर में 12 महीने होते हैं, जिनकी शुरुआत मुहर्रम से और समाप्ति ज़ुल-हिज्जा पर होती है। हिजरत मुस्लिम समुदाय के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है—यह एक भौतिक यात्रा और मदीना में पहले इस्लामी राज्य की स्थापना, दोनों को दर्शाती है।

मदीना का ऐतिहासिक नाम
पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की हिजरत से पहले मदीना को यसरिब के नाम से जाना जाता था। उनके यहाँ आने के बाद, मदीना को ‘मदीनतुन-नबी’ या मदीना कहा जाने लगा।
ﷺ का आख़िरी विश्राम-स्थल मदीना" width="950" height="500" srcset="/ri/480/blog/posts_images/more_imgs/173273922765-10-rare-facts-about-medina-saudi-arabia-every-muslim-should-know.webp 480w, /ri/780/blog/posts_images/more_imgs/173273922765-10-rare-facts-about-medina-saudi-arabia-every-muslim-should-know.webp 780w, /blog/posts_images/more_imgs/173273922765-10-rare-facts-about-medina-saudi-arabia-every-muslim-should-know.webp 950w" sizes="(max-width: 767px) 100vw, 768px" loading="lazy" decoding="async">पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का आख़िरी विश्राम-स्थल मदीना
मदीना में मस्जिद-ए-नबवी है, जहाँ पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ का मज़ार मुबारक है। पैग़म्बर ﷺ के अलावा, मदीना उनके कई प्रसिद्ध सहाबा का भी आख़िरी विश्राम-स्थल है, जिन्हें पास के जन्नतुल बक़ी क़ब्रिस्तान में दफ़न किया गया है। इस क़ब्रिस्तान में पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की प्रिय पत्नी, हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की क़ब्र भी है, साथ ही अन्य प्रमुख सहाबा की क़ब्रें भी हैं। यह शहर दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अत्यंत आध्यात्मिक महत्व रखता है और एक आदरणीय ज़ियारतगाह है।

दिल से की गई मेहमाननवाज़ी के ज़रिए मदीना की रूह को जानें!
इस पवित्र शहर में विश्वस्तरीय होटल हैं, जो ज़ायरीन और आगंतुकों को यादगार ठहराव देते हैं और जहाँ आप घर जैसा महसूस कर सकते हैं! यहाँ किफ़ायती होटलों से लेकर 5-सितारा आलीशान ठहरने की जगहें हैं, जैसे ज़ाहा अल मुनव्वरा होटल, एम प्लैटिनम होटल, अलजाद मदीना होटल, एलाफ़ अल तक़वा होटल और कई अन्य, जहाँ से मस्जिद-ए-नबवी तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। हर होटल इस शहर के सुकून का सम्मान करते हुए मेहमानों को बेहतरीन बरकत, आदर और देखभाल देने की कोशिश करता है।

मुबारक मस्जिदों का शहर
मदीना सिर्फ़ एक शहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता और इस्लामी विरासत का केंद्र है। इसे जानने का सबसे अच्छा तरीका इसकी मस्जिदों की सैर करना है, क्योंकि मदीना इन्हीं के लिए मशहूर है!
अपनी सैर मस्जिद-ए-नबवी से शुरू करें, जो मदीना का केंद्र है, फिर मस्जिद क़िबलतैन और मस्जिद क़ुबा के सुकून भरे माहौल को देखने जाएँ। हर मस्जिद की इस्लामी विरासत में अपनी ख़ास अहमियत है और यहाँ इबादत करने वालों तथा आगंतुकों का स्वागत पवित्र और शांत वातावरण में होता है, जो सचमुच विस्मयकारी है!
इसके अलावा, मस्जिद-ए-नबवी का निर्माण पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने करवाया था और आज यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद के रूप में जानी जाती है। अंदर जाने पर आपको एक विशाल सहन दिखाई देगा, जिसके चारों ओर शानदार और बारीक वास्तुकला है। इसका हर कोना पैग़म्बर ﷺ की शिक्षाओं और संदेशों की रूह से सराबोर है। मस्जिद क़ुबा की ज़ियारत ज़रूर करें—यह इस्लाम की पहली मस्जिद है!

वही और सम्मानित सूरहें
हममें से ज़्यादातर लोग मदीना के इस तथ्य से अनजान हैं कि पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ को मदीना में अल्लाह की ओर से वही मिलती रही। पवित्र क़ुरआन की 114 सूरहों में से 28 इस मुबारक शहर में नाज़िल हुईं और इन्हें मदनी सूरहें कहा जाता है। इन सूरहों में दिल को छू लेने वाली शिक्षाएँ हैं, जो आज भी लोगों के दिलों में उतरती हैं।

चिंतन और तीर्थयात्रा का शहर—जहाँ ग़ैर-मुस्लिम भी जा सकते हैं!
गहरी आध्यात्मिक अहमियत वाला शहर मदीना, मुसलमानों और ज़ायरीन का स्वागत करने के साथ-साथ ग़ैर-मुस्लिमों को भी शहर के बाहरी इलाक़ों से इसकी समृद्ध इस्लामी विरासत जानने का अवसर देता है। ग़ैर-मुस्लिम मस्जिद-ए-नबवी के आसपास के पवित्र क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते, लेकिन मस्जिद की सीमाओं के बाहर से शहर की शानदार वास्तुकला और ऐतिहासिक स्थलों को निहार सकते हैं।
मुसलमानों के लिए मदीना की ज़ियारत करना और मस्जिद-ए-नबवी में नमाज़ पढ़ना बेहद प्रिय परंपरा है, ख़ास तौर पर उमराह या हज के बाद। इस ज़ियारत के दौरान पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ पर दुरूद भेजने का रिवाज है, जो इसे तीर्थयात्रा का अहम हिस्सा और इबादत का एक अर्थपूर्ण तरीक़ा बनाता है।

खजूर—मदीना का मीठा ख़ज़ाना
रेगिस्तानी माहौल के बावजूद, मदीना अपनी बेहतरीन खजूरों के लिए मशहूर है, जिनका स्वाद दुनिया में कहीं और नहीं मिलता। शहर में खजूरों की 300 से अधिक किस्में हैं, और इनके बेमिसाल स्वाद व गुणवत्ता के कारण मदीना की खजूरें दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। इनमें अजवा खजूर ख़ास तौर पर ज़रूर चखने लायक है। यह न सिर्फ़ बेहद स्वादिष्ट है, बल्कि इस्लामी इतिहास में भी इसका विशेष महत्व है, जिससे यह स्वाद और रूह—दोनों के लिए एक अनोखी और अर्थपूर्ण नेमत बन जाती है।
मदीना में खान-पान—स्वादिष्ट अनुभव के लिए ध्यान रखने योग्य कुछ बातें!
मदीना के मुबारक शहर में खाना खाते समय इस्लामी परंपरा पर आधारित स्थानीय रीति-रिवाजों और खान-पान के नियमों का सम्मान करना ज़रूरी है। एक अहम बात यह है कि हलाल खान-पान के नियमों के अनुसार सूअर का मांस खाना मना है। हालाँकि, चिंता की कोई बात नहीं—मदीना के खान-पान में स्वादिष्ट विकल्पों की भरमार है, जो हर तरह की भूख को मिटा सकते हैं।
आप ख़ुशबूदार भेड़ के मांस के पकवान, नरम और रसीला चिकन, और कई तरह के स्थानीय ख़ास व्यंजनों का लुत्फ़ उठा सकते हैं। इन सभी को स्थानीय जड़ी-बूटियों और मसालों के अनोखे मेल से तैयार किया जाता है।







