मदीना सऊदी अरब का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और यही वह शहर है जहाँ इस्लाम की पहली मस्जिद—मस्जिद क़ुबा—बनाई गई थी। यहीं उहुद की प्रसिद्ध जंग लड़ी गई थी और यहीं जन्नतुल बक़ी का क़ब्रिस्तान है, जहाँ इस्लाम की कई मशहूर हस्तियों की क़ब्रें हैं। यहाँ आलीशान किंग फ़हद (रहमतुल्लाह अलैह) पवित्र क़ुरआन मुद्रण परिसर भी है, जहाँ से दुनिया भर में क़ुरआन की ज़्यादातर प्रतियाँ छापकर वितरित की जाती हैं।
लेकिन ये वे जगहें हैं जिनके बारे में आम तौर पर पर्यटक जानते हैं। मगर मदीना के उन हिस्सों का क्या, जिन पर शायद किसी का ध्यान न गया हो या जिन्हें बहुत कम तवज्जोह मिली हो?
आप इन्हें छिपे हुए ख़ज़ाने भी कह सकते हैं। तो पेश हैं मदीना की वे 10 बातें, जिनके बारे में ज़्यादातर लोग नहीं जानते। हमने इनके बारे में अच्छी तरह शोध करके इन्हें आपके लिए ढूँढ़ा है!
एक नज़र में
10 जगहें · स्वाइप करें
01अल-उस्बा: पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ से पहली मुलाक़ात की जगहमदीना की हिजरत के बाद से ही इस्लाम की महान अहमियत स्पष्ट हो गई थी। कई सहाबा ने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के…
02बनू हराम की गुफ़ा: सजदे की गुफ़ासजदे की गुफ़ा के नाम से भी मशहूर यह पवित्र स्थान मदीना में सिलाअ पर्वत की पश्चिमी ओर स्थित है। इसका…
03मस्जिद अल-मुअर्रस: सुकून का विश्राम-स्थलमक्का से मदीना के रास्ते में एक ऐसी जगह है जहाँ सुकून का एहसास हवा में भी महसूस होता है। मस्जिद…
04मस्जिद-ए-नबवी की छत: सुकून पाने की एक छिपी जगहशायद बहुत कम लोगों को पता हो कि मस्जिद-ए-नबवी की छत पर नमाज़ पढ़ने या सुकून से बैठने की जगह है। यह सचमुच…
05मस्जिद अबू बक्र: गहरी आध्यात्मिक अहमियत वाली सादा मस्जिदमस्जिद-ए-नबवी की दक्षिण-पश्चिमी ओर स्थित मस्जिद अबू बक्र को मदीना का एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल माना जाता…
06दार-उल-मदीना संग्रहालय: मदीना की विरासत का सफ़रमदीना के लोगों के बीच एक मशहूर सांस्कृतिक और विरासत स्थल दार-उल-मदीना संग्रहालय है, हालाँकि बहुत से लोग…
07हिजाज़ रेलवे संग्रहालय: इस्तांबुल से मदीना का भुला दिया गया रिश्ताइतिहास और संस्कृति का अद्भुत नमूना हिजाज़ रेलवे कभी सऊदी अरब को अलग-अलग संस्कृतियों से जोड़ती थी और अरब…
08मस्जिद अल-ग़मामा: बारिश की दुआ की मस्जिदइस जगह की बहुत अहमियत है, क्योंकि मदीना में भीषण सूखे के दौरान पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने यहीं…
09यान्बू बीच: मदीना के पास समुद्र-तट पर सैरअगर आप मदीना से बाहर किसी खुले स्थान की सैर का इरादा रखते हैं, तो यह जगह आपको वाक़ई हैरान कर देगी—इसीलिए…
10अल-ग़र्स कुआँ: पैग़म्बर ﷺ की विरासत से जुड़ा एक स्रोतअल-ग़र्स कुआँ अब इस्तेमाल में नहीं है, लेकिन कभी इसे यह सौभाग्य हासिल था कि पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने इसका…

अल-उस्बा: पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ से पहली मुलाक़ात की जगह
मदीना की हिजरत के बाद से ही इस्लाम की महान अहमियत स्पष्ट हो गई थी। कई सहाबा ने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के फ़ैसले और उनके सफ़र में उनका साथ दिया। मदीना पहुँचने के बाद सहाबा और पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की पहली मुलाक़ात जिस जगह हुई, वह अल-उस्बा था—शहर के ठीक बाहर स्थित एक गाँव। यह गाँव औस क़बीले की एक शाखा, बनू जहजबा, का ठिकाना था। यहाँ एक मस्जिद भी बनाई गई, जिसे मस्जिद अल-उस्बा के नाम से जाना जाता है। मदीना में इसका ऐतिहासिक महत्व है। पास ही अल-हाजिम नाम का एक कुआँ भी है, जिसका इस्तेमाल पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ और उनके सहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) ने किया होगा।

बनू हराम की गुफ़ा: सजदे की गुफ़ा
सजदे की गुफ़ा के नाम से भी मशहूर यह पवित्र स्थान मदीना में सिलाअ पर्वत की पश्चिमी ओर स्थित है। इसका ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यहीं सहाबी हज़रत मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की अनुपस्थिति देखकर उन्हें तलाश किया और उन्हें देर तक सजदे की हालत में पाया।
पूछने पर हज़रत मुआज़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) को पता चला कि फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) अभी-अभी पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के पास अल्लाह का संदेश लेकर आए थे—जिसमें उन्हें यक़ीन दिलाया गया था कि अपनी उम्मत के मामले में उन्हें निराशा नहीं होगी। शुक्रगुज़ारी और आध्यात्मिक निकटता के भाव से पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ सजदे में झुक गए थे।
यह गुफ़ा जंग-ए-ख़ंदक़ के दौरान पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ को पनाह देने के लिए भी जानी जाती है। बताया जाता है कि उन्होंने यहाँ कई रातें बिताईं। जंग के मैदान से दूरी के कारण युद्ध की अफ़रा-तफ़री के बीच यह एक शांत ठिकाना था।

मस्जिद अल-मुअर्रस: सुकून का विश्राम-स्थल
मक्का से मदीना के रास्ते में एक ऐसी जगह है जहाँ सुकून का एहसास हवा में भी महसूस होता है। मस्जिद अल-मुअर्रस, मस्जिद ज़ुल-हुलैफ़ा की दक्षिण-पूर्वी ओर स्थित है। पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ वापसी के सफ़र के दौरान यहाँ विश्राम किया करते थे। आज यहाँ एक पेड़ इसकी पहचान है, जहाँ इसकी मुबारक मौजूदगी से जुड़ाव महसूस किया जा सकता है। मदीना के बारे में यह उन तथ्यों में से एक है, जिनसे आप शायद अब तक अनजान रहे होंगे!

मस्जिद-ए-नबवी की छत: सुकून पाने की एक छिपी जगह
शायद बहुत कम लोगों को पता हो कि मस्जिद-ए-नबवी की छत पर नमाज़ पढ़ने या सुकून से बैठने की जगह है। यह सचमुच एक छिपा हुआ ख़ज़ाना है—यहाँ आप चिंतन कर सकते हैं, आध्यात्मिकता की तलाश कर सकते हैं, भीड़-भाड़ वाले सहन से दूर नमाज़ पढ़ सकते हैं या बस मस्जिद की ख़ूबसूरती निहार सकते हैं। यहाँ कालीन बिछे फ़र्श, ज़मज़म के पानी के नल और खुले आसमान के नीचे शांत माहौल है, जो सुकून पाने का मौक़ा देता है। हालाँकि, कई लोग अपनी यात्रा के दौरान इस जगह को देख नहीं पाते।

मस्जिद अबू बक्र: गहरी आध्यात्मिक अहमियत वाली सादा मस्जिद
मस्जिद-ए-नबवी की दक्षिण-पश्चिमी ओर स्थित मस्जिद अबू बक्र को मदीना का एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल माना जाता है। इसकी अंदरूनी और बाहरी बनावट ख़ूबसूरत है। सादी, शांत सफ़ेद दीवारों के साथ यहाँ नमाज़ की जगह पर कालीन बिछे हैं। मस्जिद की सादी वास्तुशैली पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के प्यारे सहाबी हज़रत अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) की सादगी को दर्शाती है। जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे अक्सर नमाज़ पढ़ने और आध्यात्मिक लाभ पाने के लिए यहाँ आते हैं।

दार-उल-मदीना संग्रहालय: मदीना की विरासत का सफ़र
मदीना के लोगों के बीच एक मशहूर सांस्कृतिक और विरासत स्थल दार-उल-मदीना संग्रहालय है, हालाँकि बहुत से लोग शायद इसके बारे में नहीं जानते। यह शहर के केंद्र में स्थित है और यहाँ कला की लगभग 2,000 अनूठी वस्तुएँ प्रदर्शित हैं, जो शहर के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास को बयान करती हैं। पर्यटक अलग-अलग पुरावशेष, पांडुलिपियाँ, नक़्शे और मॉडल देख सकते हैं, जो समय के साथ शहर के विकास को दर्शाते हैं। दार-उल-मदीना संग्रहालय में नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। यहाँ दृश्य सामग्रियों, मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों और जानकारीपूर्ण स्क्रीन के ज़रिए चीज़ों को देखना और उनसे जुड़ना दिलचस्प बन जाता है।

हिजाज़ रेलवे संग्रहालय: इस्तांबुल से मदीना का भुला दिया गया रिश्ता
इतिहास और संस्कृति का अद्भुत नमूना हिजाज़ रेलवे कभी सऊदी अरब को अलग-अलग संस्कृतियों से जोड़ती थी और अरब प्रायद्वीप के साझा इतिहास को समझने का एक ज़रिया थी। 20वीं सदी की शुरुआत में बनी इस परियोजना ने इस्तांबुल को मदीना से जोड़ा। इसकी स्थापना 1419 हिजरी में प्रिंस अब्दुल मजीद इब्न अब्दुल अज़ीज़ (रहमतुल्लाह अलैह) ने की थी। यह मदीना में उमर बिन ख़त्ताब सड़क पर, अनबरिया के पास स्थित है। आज यह स्थल एक सांस्कृतिक आकर्षण है, जहाँ पुराने भौगोलिक पुरावशेष, कला की 2,000 वस्तुएँ और मदीना के ऐतिहासिक अतीत की तस्वीरें प्रदर्शित हैं।

मस्जिद अल-ग़मामा: बारिश की दुआ की मस्जिद
इस जगह की बहुत अहमियत है, क्योंकि मदीना में भीषण सूखे के दौरान पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने यहीं सलातुल-इस्तिस्क़ा (बारिश की दुआ की नमाज़) अदा की थी—और अल्लाह ने उनकी दुआ क़ुबूल की तथा घने बादलों से बारिश बरसी। मदीना से जुड़ी एक बात यह भी है कि इसे मस्जिद-ए-ईद भी कहा जाता है, क्योंकि पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने अपने आख़िरी दिनों में यहाँ ईद की नमाज़ भी अदा की थी। यह मस्जिद-ए-नबवी के बाबुस्सलाम दरवाज़े से 500 मीटर पश्चिम में स्थित है।

यान्बू बीच: मदीना के पास समुद्र-तट पर सैर
अगर आप मदीना से बाहर किसी खुले स्थान की सैर का इरादा रखते हैं, तो यह जगह आपको वाक़ई हैरान कर देगी—इसीलिए हम इसे आपकी “मदीना में करने लायक़ चीज़ों” की सूची में शामिल करने की सलाह देते हैं। मदीना से 231 किमी दूर यान्बू शहर में स्थित इस जगह पर परिवार के साथ समुद्र-तट पर ख़ुशनुमा समय बिताया जा सकता है। यहाँ खाने-पीने के कई विकल्प हैं और पानी के अलग-अलग खेलों जैसी मनोरंजक गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है।

अल-ग़र्स कुआँ: पैग़म्बर ﷺ की विरासत से जुड़ा एक स्रोत
अल-ग़र्स कुआँ अब इस्तेमाल में नहीं है, लेकिन कभी इसे यह सौभाग्य हासिल था कि पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने इसका पानी पिया। उन्होंने अपनी वफ़ात के बाद इसी पानी से ग़ुस्ल दिए जाने की भी इच्छा जताई थी। अल-ग़र्स कुआँ मस्जिद क़ुबा से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है। इस्लामी इतिहास से वाक़िफ़ लोग अब भी इस कुएँ को देखने आते हैं और इसके आसपास के इलाके की सैर करना पसंद करते हैं।
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